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इतिहास शोध एवं संकलन यात्रा 

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01 Apr 23
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इतिहास शोध एवं संकलन यात्रा 

उदयपुर। मेवाड़  के ऐतिहासिक स्थलो के अन्वेषण एवं वहां बिखरे हुए इतिहास और पुरातात्विक साक्ष्यो की शोध खोज के अभियान के तहत इतिहास संकलन योजना के  कार्यकर्ताओ ने क्षेत्रीय संगठन मंत्री छगनलाल बोहरा के नेतृत्व मे मेवाड के अतिप्रसिद्ध ऐतिहासिक महत्व के स्थान बागोर की यात्रा की और वहां स्थानीय लोगों के साथ संवाद कर बागोर के इतिहास एवं प्राचीन सभ्यता की जानकारी ली । भीलवाड़ा के वरिष्ठ कार्यकर्ता महेश नुवाल के संयोजन मे बागोर  गढ मे आयोजित गोष्ठी मे मुख्य वक्ता के रूप मे बोलते हुए छगनलाल बोहरा ने कहा कि " भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृति है जिसके पुरातात्विक प्रमाण मेवाड के बागोर सहित वृहत्तर भारत के अनेक देशो मे हो रहे उत्खनन से प्राप्त हो रहे है। अंगरेजी मानसिकता के इतिहासकारो ने अपने स्वार्थ और हीनताबोध से ग्रस्त इतिहास लेखन से भारत के करोड़ो वर्ष प्राचीन इतिहास को कल्पना या गल्‍प कह कर नकार दिया और अपना विकृत और विदेशी दृष्टीकोण से लिखा गया अभारतीय इतिहास सरकारी सहयोग से पाठ्यक्रमो मे स्थापित कर युवाओं के मानस को भ्रमित किया जिससे नैतिक ,आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चरित्र की हानि हुई। अब अन्धेरा छंट रहा है। राष्ट्रीय दृष्टीकोण से नवीनतम शोधखोज से प्राप्त प्रमाणो के आधार पर भारतीय चिति के आलोक मे इतिहास संकलन और लेखन कर पाठ्यक्रमो मे स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है । 
    डाॅ. ललित पाण्डे ने बताया की प्रसिद्ध पुरातत्वविद वीरेन्द्र नाथमिश्र ने यहां उत्खनन किया और इसे पाषाणकालीन सभ्यता स्थल घोषित किया ।स्थानीय इतिहासकारो श्री नारायण माली,श्री फतहसिह लोढा ,श्री श्यामसुंदर भट्ट आदि ने बताया कि यहां के राजपरिवार से समय-समय पर चार महाराणा का चयन राजगद्दी के लिए हुआ है। ईस्वी 1707 मे नांदेड जाते समय गुरुगोविंदसिंहजी महाराज ने यहां 17 दिन तक विश्राम किया था जिसकी स्मृति में गुरुद्वारा कलगीधरसाहिब बनाया गया है।  यहां प्राचीन मंदिर मूर्तियां शिलालेख विद्यमान है जिनके संरक्षण की आवश्यकता है। कोठारी नदी का पाट यहां बहुत चौडा है जो इसमे पर्याप्त जल सहित बहाव का प्रमाण  है। चितौड प्रान्त मंत्री डां.जगदीश खटीक ने प्रतिवर्ष ऐसे आयोजन का संकल्प व्यक्त किया और आयोजको एवं स्थानीय लोगो का आभार व्यक्त किया ।
 


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