GMCH STORIES

सकारात्मक पत्रकारिता व साहित्य से समाज में बदलाव संभव

( Read 4462 Times)

07 Aug 23
Share |
Print This Page
सकारात्मक पत्रकारिता व साहित्य से समाज में बदलाव संभव

बांसवाड़ा। वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अनिल सक्सेना के द्वारा पिछले 12 सालों से प्रदेश के प्रत्येक जिलों में कराए जा रहे पत्रकारिता-साहित्यिक कार्यक्रमों के क्रम में राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के बैनर तले बांसवाड़ा संभाग मुख्यालय पर ‘द होटल इंपीरियल’ में आधुनिक चिंतनः पत्रकारिता एवं साहित्य विषय पर हुई परिचर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख बुद्धिजीवियों की उत्साहपूर्ण आत्मीय भागीदारी ने आयोजन को यादगार बना दिया।

इस साहित्यिक परिचर्चा में वरिष्ठ साहित्यकारों व पत्रकारों के दक्ष पैनल के रूप में वयोवृद्ध चिन्तक भूपेंद्र उपाध्याय ’तनिक’, वरिष्ठ साहित्यकार भरत चंद्र शर्मा, प्रयोगधर्मी साहित्यकार हरीश आचार्य, श्री हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरला पण्ड्या एवं वरिष्ठ पत्रकार दीपक श्रीमाल ने अपनी बात रखी।

’हर युग में कालजयी रहा है यह अन्तर्संम्बन्ध’

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अनिल सक्सेना ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पक्षों का यथार्थ चित्रण ही सच्चा साहित्य है। उन्होंने कहा कि यही सत्य है कि साहित्य अतीत से प्रेरणा लेता है, वर्तमान को चित्रित करता है और भविष्य का सशक्त मार्गदर्शन करता है।

’मिशन भावना से दायित्व निर्वाह जरूरी’

इन सभी ने सम सामयिक संदर्भ में पत्रकारिता और साहित्य के वर्तमान सरोकारों पर सारगर्भित उद्बोधन देते हुए आजादी के समय की पत्रकारिता और आज की पत्रकारिता के संबंध में तुलनात्मक परिवर्तन के प्रभावों को संकेतित करते हुए कहा कि देश की आजादी में पत्रकारिता का अमूल्य योगदान रहा है। उस समय मिशन भावना से समाजोन्मुखी निःस्वार्थ भाव की पत्रकारिता होती थी जिसमें सिर्फ आजादी के लक्ष्य को भी ध्यान में रखकर समाचार पत्र प्रकाशित होते थे लेकिन परवर्ती कालखण्ड में क्रमिक रूप से यह क्षेत्र राष्ट्र के विकास के लक्ष्य से भटक गई। आज हम देखते हैं तो पाते हैं कि कई बड़े समाचार पत्र व्यवसायिक घरानों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं जो एक तरफा दृष्टिकोण को अपनाकर उन्हीं का सायास प्रचार-प्रसार करने में जुटे हुए हैं।

’लोकजागृति संचार में अहम् योगदान’

विशेषज्ञ वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य एक सिक्के के दो पहलू हैं। साहित्य के द्वारा सदियों से समाज में जन जागरण का कार्य किया जा रहा है। लेखकों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में नई क्रांति को दिशा दी है। साथ ही पत्रकारिता के माध्यम से भी समाज के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक जागृति का संचार हुआ है।

’त्यागनी होगी आधुनिकीकरण और व्यवसायिक मानसिकता ’

परिचर्चा में विभिन्न विधाओं के निष्णात सृजनधर्मियों और प्रबुद्धजनों का स्पष्ट मत था कि आज के इस युग में साहित्यकार सिर्फ या तो पुरस्कार, सम्मान और अभिनन्दन पाने के लिए अपनी पुस्तक एवं लेखनी पर कार्य कर रहा है, जिससे वह अपने लक्ष्य से भटक रहा है अथवा निर्देशित सृजन को अपना चुका है। ज्यों-ज्यों  साहित्य व पत्रकारिता का आधुनिकीकरण और व्यवसायीकरण हो रहा है उसके मूल्यों में निरन्तर गिरावट आ रही है।

हमारे सांस्कृतिक व सामाजिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए

परिचर्चा में सार्वजनीन तौर पर यह निष्कर्ष सामने आया कि आज के इस डिजिटल युग में युवा पीढ़ी पुस्तकों व साहित्य से दूर होती जा रही है और पुस्तकों को पढ़ने के प्रति रुझान समाप्त हो रहा है, जिससे युवा भटक रहा है और वह अपने परम्परागत मौलिक संस्कार, सामाजिक व नैतिक मूल्यों को भूलता जा रहा है। हालात ये हैं कि जैसा हम अपने परिवार व समाज में देखते हैं वही नई पीढ़ी अपने आचरण में ढाल  रही है। जैसा हम करेंगे वैसा ही आने वाला भविष्य बनेगा। इसीलिए हमें हमारे सांस्कृतिक व सामाजिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।

’जागृति संचार में प्रभावी है साहित्य और पत्रकारिता का योग ’

आधुनिक हिंदी साहित्य में पत्रकारिता के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा गया कि साहित्य के बिना पत्रकारिता अधूरी है। एक अच्छा साहित्य पत्रकारिता के साथ जुड़कर ही उसमें निखार ला पाने में समर्थ होता है और पत्रकारिता के उद्देश्यों को पूरा करते हुए समाज में जागृति का संचार कर सकता है।

कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात सरस्वती वंदना से हुई। परिचर्चा पैनल का संचालन फोरम के संस्थापक अनिल सक्सेना ने किया।

’इन्होंने रखे प्रेरणादायी विचार’

इस अवसर पर डॉ. आशा मेहता, डॉ. महिपाल सिंह राव, डॉ. राकेश शास्त्री, डॉ. सर्वजीत दुबे, कृष्णा भावसार, मणिलाल जोशी, वीरेंद्र सिंह राव, प्रकाश पण्ड्या, भूपालसिंह राठौड़, जितेन्द्रसिंह राजावत, सुभाष नागर, ओम पालीवाल, शालिनी मिश्रा, महेश पंचाल‘माही’, संदेश जैन, अशोक मदहोश, कमलेश कमल, भारत दोसी, डॉ. दीपिका राव, जयगिरिराजसिंह चैहान, हेमंत पाठक ‘राही’, मोहनदास वैष्णव, प्रतिभा जैन, शंकर यादव, भागवत कुन्दन, संदेश जैन सहित पत्रकारों, साहित्यकारों, कलाकारों और प्रबद्धजनों आदि ने अपने विचार व्यक्त किए और फोरम द्वारा आयोजित परिचर्चा की सराहना करते हुए इसे उपलब्धिमूलक बताया।

’उत्साही सहभागिता का दिग्दर्शन’

इस अवसर पर भारती भावसार, सईद मंजर, जहीर आतिश, सईद रोशन, घनश्याम सिंह भाटी, तारेश दवे, राजेंद्र संतवाणी, प्रेरणा उपाध्याय, हीना भट्ट, धर्मेन्द्र उपाध्याय, हिमेश उपाध्याय, उत्तम मेहता ‘उत्तम’, आशीष अमोल गणावा, यामिनी जोशी, नरहरि आर. भट्ट, नन्दकिशोर वैष्णव, राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के प्रदेश सचिव गिरीश पालीवाल, सहसचिव अमित चेचाणी, मेवाड़ प्रभारी संदीप माली, भूपेन्द्र गमोत सहित प्रमुख साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे। इससे पूर्व शुभारंभ सत्र का संचालन शालिनी मिश्रा ने किया।

’पौधों का दिया उपहार’
इस अवसर राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम द्वारा राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल बांसवाड़ा के सहयोग से उपस्थित सभी अतिथियों को पौधों का उपहार प्रदान करते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प दिलाया। स्थानीय पत्रकारों व साहित्यकारों ने अनिल सक्सेना का सम्मान भी किया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories : Banswara News
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like