अतीक अहमद बना कैदी नंबर १७०५२

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Published on : 01 Apr, 23 05:04

अतीक अहमद बना कैदी नंबर १७०५२

माफिया से राजनेता बने अतीक अहमद के लिए साबरमती जेल के अंदर का माहौल अब पहले जैसा नहीं रहेगा। अब उसकी पहचान कैदी नंबर १७०५२ से होगी। चार दशकों के लंबे अपराधिक इतिहास में लगातार विचाराधीन बंदी कहला रहा पांच बार का विधायक और एक बार का सांसद अतीक अहमद जब साबरमती जेल से प्रयागराज में मंगलवार को उमेश पाल अपहरण मामले के फैसले की तारीख पर लाया गया था‚ तब तक वह एक मुलजिम था लेकिन लौटते समय उसके ऊपर मुजरिम का टैग लग गया। साबरमती जेल में उसकी पहचान कैदी नंबर डी/१७०५२ से की जाएगी। उसे अब वह सब कुछ करना होगा जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की होगी। एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिनेश चन्द्र शुक्ल ने मंगलवार को अतीक‚ दिनेश पासी और सौलत हनीफ को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायक राजूपाल की हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल के २५ जनवरी २००५ अपहरण के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाया। सश्रम कारावास की सजा पाए कैदियों को सजा काटने के दौरान काम भी करना पडेगा।   साबरमती सेन्ट्रल जेल के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जेल में विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के लिए मानदंड बिल्कुल अलग होता है। अतीक को अब सजायाफ्ता कैदियों के साथ रखा जाएगा। अब वह अपने कपड़े नहीं पहन सकेगा। उसे सजायाफ्ता कैदियों की तरह जेल के ही कपड़े पहनने होंगे। उसे ड्रेस कोड का पालन करना होगा। 


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